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अंटी

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंटी संज्ञा पुं॰ [सं॰ अण्ड] [क्रि अँटियाना]

१. उँगलियों के बीच का स्थान । अंतर । घाई ।

२. धोती की वह लपेट जो कमर पर होती है और जिसमें पैसा भी रखते हैं । गाँठ । मुर्री । मुहा॰—अंटी करना—किसी का माल उड़ा लेना । धोखा देकर कोई वस्तु ले लेना । अंटी चढ़ाना = अपने मतलब पर लाना । वश में करना । अपने दाँव पर लाना । अंटी पर चढ़ाना = अपने दाँव में लाना । अंटी मारना = (१) जुवा खेलते समय काँड़ी को उँगलियों के बीच में छिपालेना । (२) आंख बचाकर धीरे से दूसरे की वस्तु खिसका लेना । धोखा देकर कोई चीज उड़ा लेना । (३) तराजू की डाँड़ी को इस ढंग से पकड़ना कि तौल में चीज कम चढ़े । कम तौलना । डाँड़ी मारना । अंटी रखना = छिपा रखना । दबा रखना । प्रगट न ह ने देना ।

३. एक दूसरे पर चढ़ी हुई एक ही हाथ कि दो उँगलियाँ । तर्जनी के ऊपर मध्यमा को चढ़ाकर बनाई हुई मुद्रा । डोड़ैया । डड़ोइया । विशेष—इसका चलन लड़कों में है । जब कोई लड़का किसी अपवित्र वस्तु वा अंत्यज से छू जाता है तब उसके साथ के और लड़के उँगली पर उँगली चढ़ा लेते है जिसमें यदि वह उन्हें छु ले तो छूत न लगे और कहते है कि दो बाल की अंटी काला वाला छू ले । क्रि॰ प्र॰—चढ़ाना ।—बाँधना । लगाना ।

४. लच्छा । अट्टी । सूत वा रेशम की लच्छी । क्रि॰ प्र॰—करना = अटेरना । लछियाना । लपेटना । लच्छ बाँधना ।

५. अटेरन । वह लकड़ी की वस्तु जिसपर सूत लपेटते है ।

६. विरोध । बिगाड़ । लड़ाई । शरारत ।

७. कान में पहनने की छोटी बाली जिसे धोबी, कछी, कँहार आदि नीच जाति के मर्द पहनते है । मुरकी । छोटी बाली ।

८. जेब । खलीता (को॰) ।