अंतभवि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अंतभवि संजा पुं॰ [सं॰ अन्तर्भाव] [वि॰ अन्तर्भवित; अन्तर्भूत, संक्षा अन्तर्भावना]
१. मध्य में प्राप्ति । भीतर समावेश । अंतर्गत होना । शामिल होना ।—उ॰ अन्य अर्थालंकारों का उपमा, दीपक ओर रूपक में अंतभवि है । (अर्यात् अन्य अलंकार उपमा दीपक आदि के अंतर्गत है)—(शब्द॰) ।
२. तिरोभाव । विलीनता । छिपाव ।
३. नाश । अभाव ।
४. आर्हत या जैन दर्शन में आठ कर्मों का क्षय दिससे मोक्ष होता है । क्रि॰ प्र.—करना ।—होना । ।
५. भीतर का भाव । आंतरिक अभिप्राय । आशय । मंशा ।