अंतरचक्र
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अंतरचक्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्तरचक्र]
१. दिशाओ और विदिशाओं के बीच में अंतर को चार चार भागों में बाँटने से बने हुए ३२ भाग ।
२. दिशाओं के ऊपर कहे हुए भिन्न भिन्न विभागों में चिड़ियों की बोली सुनकर शुभाशुभ फल बताने की विद्या । जिस दिशा में पक्षी बैठकर बोले उसका विचार करके शकुन कहने की विद्या ।
३. तंत्र के अनुसार शरीर के भीतर माने हुए मूलाधार आदि कमल के आकार के छह चक्र । षट्चक्र ।
४. आत्मीय वर्ग । स्वजन वर्ग । भाई बंधुओं की मंडली ।