अंतरदाह
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अंतरदाह संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्तर्दाह] भीतरी जलन का दुःख । मानसिक ताप । उ॰—अतरर्दाह जु मिटयौ त्यास कौ इव चित ह्वै भाग- वत किऐं ।—सूर॰, १ । ८९ ।
अंतरदाह संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्तर्दाह] भीतरी जलन का दुःख । मानसिक ताप । उ॰—अतरर्दाह जु मिटयौ त्यास कौ इव चित ह्वै भाग- वत किऐं ।—सूर॰, १ । ८९ ।