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अंतर्जगत्

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंतर्जगत् संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्तर्जगत्] अंतस्तल । भीतरी जगत् । मन का संसार । उ॰—अँधकार का आलोक से, असत् का सत् से, जड़ का चेतन से, और बाह्मा जगत् का अंतर्जगत् से संबंध कौन कराती है ? कविता ही न ?—स्कंद॰, पृ॰ २१ ।