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अंतर्दशा

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंतर्दशा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अन्तर्दशा]

१. फलित ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के जीवन में जो ग्रहों के भोगकाल नियत हैं उन्हें दशा कहते हैं । मनुष्य की पूरी आयु १२० वर्ष की मानी गई है । इस १२० वर्ष के पूरे समय में प्रत्येक ग्रह के भोग के लिये वर्षो की अलग अलग संख्या नियत है जिसे महादशा कहते हैं, जैसे सूर्म की महादशा ६ वर्ष, चंद्रमा की १० वर्ष इत्यादि । अब इस प्रत्येक गह के नियत भीगकाल वा महादशा के अंतर्गत भी नवग्रहों के भोगकाल नियत हैं जिन्हें अंतर्दशा कहते हैं । जैसे सूर्य के ६ वर्ष में सूर्य का भोगकाल ३ महीने १८ दिन और चंद्नमा का ६ महीने इत्यादि । कोई कोई अष्टोत्तारी गणना के अनुसार अर्थात् १०८ वर्ष की आयु मानकर चलते हैं ।

२. मनः स्थिति । चित्त की वृत्ति । उ॰—अनेक भाव तथा अंतर्दशाएँ उसके संचारी के रूप में आती हैं ।—रस॰, पृ॰ ६५ ।