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अंतर्लापिका

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंतर्लापिका संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अन्तर्लापिका] वह पहेली जिसका उत्तर उसी पहेल के अक्षरों में हो । उ॰—(क) कौन जाति सीता सती, दई कौन वहँ तात । कौन ग्रंथ बरण्यो हरी, रामायण अवदात ।—केशव (शब्द॰) । इस दोहे में पहले पूछा हैं कि सीता कौन जाति थी ? उत्तर—रामा = स्त्री । फिर पूछा कि उनके पिता ने उन्हें किसको दिया? उतर रामाय = राम कों । फिर पूछा किस ग्रंथ में हरण लिखा गया है । उत्तर हुआ 'रामायण' । (ख) चार म्हीने बहुत चलै औ आठ महीने थोरी । अमीर खुसरो यों वहै तू बूभ पहेली मोरी ।—(शब्द॰) । इसमें 'मोरी' शब्द ही उत्तर है ।