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अंधविंदु

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अंधविंदु संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्धाविन्दु] आँख के भीतरी पटल पर का वह स्थान जो प्रकाश को ग्रहण नहीं करता और जिसके सामने पड़ी हुई वस्तु दिखाई नहीं देती । विशेष—नेत्रपटल पर ज्ञानतंतु पीछे से आकर शिराओं के रुप में फैले हुए है और मुड़कर शंकु और छड़ियों के आकार में हो गए हैं । मनुष्य की आँख में इन शंकुओं की संख्या ३३,६०, ॰॰० मानी गई है । ये छड़ियाँ वा शंकु आकार और रंग का परिज्ञान कराने में काम देते है । यदि प्रकाश ऐसे स्थान पर पड़े जहाँ कोइ शंकु न हो तो कुछ देख नहीं पड़ता । यही स्थान अंधबिंदु कहलाता है ।