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अक्खोमक्खो

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अक्खोमक्खो संज्ञा पुं॰ [सं॰ अक्षि+ मुख प्रा॰ अक्ख+ मुख, पु अक्खोमक्खो] दिपक की लौ तक हाथ ले जाकर बच्चे के मुहँ पर फेरना ताकि उसे कुदृष्टि न लगे । विशेष—बुरी नजर से बचाने के लिये स्त्रियाँ संध्या के समय छोटे बच्चों के चेहरे पर इस प्रकार हाथ फेरती हुई कहती है— 'अक्खो मक्खो दिया बरक्खो' । जो कोई मेरे बच्चे को तक्के उसकी फूटें दोनों अक्खें,' इत्यादि ।