अक्षयतूणीर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अक्षयतूणीर संज्ञा पुं॰ [सं॰] ऐसा तरकस जिसके बाण कभी समाप्त नहीं होते । उ॰—'अक्षय तृणीर अक्षय कवच सब लोगों ने सुना होगा, परंतु इस अक्षय मंजूषा का हाल मेरे सिवा कोई नही जानता । —स्कंद॰, पृ॰ १७ ।
अक्षयतूणीर संज्ञा पुं॰ [सं॰] ऐसा तरकस जिसके बाण कभी समाप्त नहीं होते । उ॰—'अक्षय तृणीर अक्षय कवच सब लोगों ने सुना होगा, परंतु इस अक्षय मंजूषा का हाल मेरे सिवा कोई नही जानता । —स्कंद॰, पृ॰ १७ ।