सामग्री पर जाएँ

अगोटना

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अगोटना ^१ पु † क्रि॰ स॰ [हिं॰ अगोट से नाम॰ अथवा सं॰ अग्र, प्रा॰ अग्ग+हिं॰ ओट+ना (प्रत्य॰)]

१. रोकना । छेँकना । उ॰—सत्रु कोट जो पाय अगोटी । मीठी खाँड़ जेँवाए रोटी ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. बंद कर रखना । रोक रखना । पहरे में रखना । कैद रखना । उ॰—जौ गुनही, तौ रखियै आँखिनु माँझ अगोटि ।—बिहारी र॰, दो॰ २५० ।

३. छिपाना । ढाँकना । उ॰—कीजै किन ब्यौत अगोटन को । है चोर यही मनमोहन को ।—भिखारी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ २४२ ।

अगोटना पु ^२ क्रि॰ स॰ [सं॰ आक्रोड, प्रा॰ अक्कोड़, हिं॰ 'अगोट' से नाम॰]

१. अंगीकार करना । स्वीकार करना ।

२. पसंद करना । चुनना । उ॰—लगत कल्प शतकोटि एक एक के गुन गनत । मन में लेहि अगोटि जो सुंदर नीकी लगै ।— गुमान (शब्द॰) ।

अगोटना पु ^३ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ अगोट (= रोक) से नाम॰] रुकना ठहरना । अड़ना । फँसना । उलझना । उ॰—सुनत भावती बात सुतनि की झूठहिँ धाम के काम अगोटी ।— सूर॰, १० । १६५ ।