अग्निबाव
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अग्निबाव संज्ञा पुं॰ [हिं॰ अगिन + बाव = वायु] एक रोग का नाम जो चौपायों में, विशेषतः घोड़ी को, होता है ।
अग्निबाव संज्ञा पुं॰ [सं॰ अग्नि + वायु, प्रा॰ बाव]
१. घोड़ों और चौपायों का एक रोग जिसमें उनके शरीर पर छोटे आबले निकलते हैं और फूट फूटकर फैलते हैं । यह रोग अधिकतर घोड़ों को ही होता है ।
२. मनुष्यों का एक चर्मरोग जिसमें शरीर पर बड़े बड़े लाल चकत्ते या ददोरे निकल आते हैं । पित्ती । जुड़पित्ती । ददरा ।
३. अग्नि की ज्वाला या लपट । उ॰—पुंडीर चंद जनु अग्निबाव । —पृ॰ रा॰, ८ । १४ ।