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अठताल

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अठताल पु॰ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अष्टताल]

१. एक प्रकार का गीत । उ॰—यो अठतालो गीत उचारैं, कहै मंछ प्रभु गुण इक धारैं—रघु॰ रू॰, पृ२०६ । पिशेष—इसमें आठ चरण होते हैं ।प्रथम तीन चरण चौदह मात्राओं के होते हैं और चौथा चरण दास मात्राओं का रहता है जिसके तुकांत में लघु गुरू रहता हैं । इसी प्रकार चार चरणों का दुसरा द्वाला बनाया जाता हैं । इसमें चौथे और आठवें चरण का तुकां प्रथम, द्वितीय, तृतीय, पंचम और सप्तम के साथ मिलता हैं । प्रथन द्वाले क प्रथम पद में अठारह मात्राएँ होती हैं ।

२. दे॰ 'अष्ठताल' । वाध । उ॰ —बाजत बैनु ह बिषान बाँसुरी डफ मृदंग अठताल ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰२९६ ।