अड़ार
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अड़ार ^१ वि॰ [सं॰ अराल] ।
१. अड़नेवाला । स्थिर रहनेवाला । उ॰—जग ड़ोलै ड़ोलव । नैनाहाँ । उलटि अड़ार जाहि पल माहाँ । —जायसी ग्रं॰ पृ॰ ४२ ।
२. टेढ़ा । तिरछ ।
अड़ार ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अट्टाल=बुर्ज ऊँचा स्थान]
१. समूह । राशी । ढेर । उ॰— पम पितु अन्न अड़ार जुहायो । क्रम क्रम ते सब जनन बड़ायो । —विश्राम (शब्द॰) ।
२. ईंधन का ढ़ेर जो बेचने के लिये रखा हो ।
३. लक़ड़ी या ईंधन की दूकान ।
४. गायों भैसों के रहने का घेरा या बाड़ा ।