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अतुल्ययोगिता

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अतुल्ययोगिता संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] जहाँ कई वस्तुओं का समान धर्म कथन होने के कारण तुल्ययोगिता की संभावना दिखाई पड़ने पर भी किसी एक अभीष्ट वस्तु का बिरुद्ध गुण बतलाकर उसकी विलक्षणता दिखलाई जाय वहाँ इस अलंकार की कल्पना कविराजा मुरारिदान ने की है । उ॰—हय चले हाथी चले संग छोड़ि साथी तले, ऐसी चलाचली में अचल हाड़ा ह्वै रहयो । —भूषण ग्रं॰, पू॰ १३३ ।