अन्धधुन्ध
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अंधधुंध ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अन्ध = अन्धकार + धुम = धुआँ अथवा अंन्ध + धुनन (कंपन हलचल), सं॰ अन्ध + हिं॰ धुंध]
१. अंधकार । अँधेरा । उ॰—(क) अति विपरीत तृणावर्त आयो । बातचक्र मिस ब्रज के ऊपर नंद पँवरि से भीतर आयो । अंधधुंध भयो सब गोकुल जो जहाँ रह्यो सो तहाँ छयायो ।—सुर॰, (शब्द॰) । (ख) काउलै ओट रहत वृक्षन की अंधक्षुंध दिसि बिदिसि भुलाने ।—सुर॰, १० ।८
६०. ।.
२. अंधाधुंध । अंधेर । अनरंति । दुराचर । अनियमित व्यापार । उच्छृंखल कर्म । उ॰—समुझि न परै तिहारी मधुकर, हम ब्रजनारि गँवार । सुरदास ऐसी क्यों निब अंधधुंध सरकार ।—सुर॰, १० ।३९०९ ।
अंधधुंध ^२ वि॰ विशाल । अपार ।उ.— देखत मदंध दसकंध अंधधुंध दल बंधु सों बलकि बोल्यों राजा राम बरिबंड ।—भिखारी॰ ग्रं॰, भा॰२, पृ॰ ३२ ।