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अपट्ठमान

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अपट्ठमान पु वि॰ [सं॰ अपट्यमान]

१. जो पढ़ा न जाय ।न पढ़ने योग्य । उ॰—अपट्ठमान पापग्रंथ, पट्ठमान वेद है ।—केशव (शब्द॰) ।