अपूर्वविधि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अपूर्वविधि संज्ञा पुं॰ [सं॰] उस वस्तु को प्राप्त करने की विधी जिसका बोध प्रत्यक्ष, अनुमान आदि प्रमाणो द्वारा न हो सके । जैसे, स्वर्ग की कामना हो तो यज्ञ करे । यहाँ पर स्वर्ग, जिसकी प्राप्ति की विधि बताई गई है प्रत्यक्ष और अनुमान आदि द्वारा सिद्ध नहीं होता । विशेष—यह विधी चार प्रकार की है-(क) कर्मविधि—जैसे, अग्निहोत्र करे तो स्वर्ग होगा । (ख) गुणविधि—जिसमे यज्ञ या कर्म की अनुष्ठान की सामग्री और देवता आदि का निर्देश हो । (ग) विनियोग विधि-जैसे, गार्हपत्य में इंद्र की ऋचा का विनियोग करे । (घ) प्रयोग विधि—अर्थात् अमुक कार्म के हो जाने पर अमुक कर्म करने का आदेश, जैसे—गुरुकुल से विद्या पढ़कर समावर्तन करे ।