अबन्धु
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अबंधु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अबंधु] अमित्र । शत्रु । उ॰ —बंधु अबंधु हिये मँह जानै । ताकर लोग विचार बखानै ।—राम चं॰, पृ॰ १५१ ।
अबंधु ^२ बि॰
१. मित्रविहीन । एकाकी । अकेला ।
२. अनाथ । जिसके कोइ न हो [को॰] ।
२. बंध या सीमाहीन । असीम । अपार । उ॰ —जिन युवकों के मणिबंधों में अबंध बल इतना भरा था जो उलटता शतध्नियों को । —लहर, पृ॰ ६७ ।