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अब्राह्मण्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अब्राह्मण्य ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह कर्म जो ब्राह्मणोचित न हो ।

२. हिंसादि कर्म ।

३. नाटकादि में दिखाए जानेवाले अनुचित कर्म के बोध या ज्ञान के लिये नेपथ्य में उदघोषित शब्द । कहीं कहीं ब्राह्मण रक्षा या सहायता की दृष्टि से भी अब्रह्मणयम् शब्द का उच्चारण करता हैं ।

अब्राह्मण्य ^२ वि॰ [सं॰] ब्राह्मणविरहित । ब्रह्मणविहीन ।

अब्राह्मण्य संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. ब्राह्मणोचित कर्तव्यों की अवज्ञा या उल्लंघन ।

२. दें॰ 'अब्रह्मण्य' ।