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अरधङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अरधंग ^१ पु संज्ञा [सं॰ अद्धङ्गि]

१. आधा अंग । उ॰—सिव साहेब अचरज भरो सकल रावरो अंग । क्यों कामहिं जारयो, कियो क्यों कामिनि अरधंग ।—भिखारी ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ १२५ ।

२. शिव । उ॰—तजै गौरि अरधंग अचल ध्रुव आसन चल्लै ।—हम्मीर॰, पृ॰ १३ ।

अरधंग ^२ वि॰ दे॰ 'अर्धांग' ।