अलेख
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अलेख ^१ वि॰ [सं॰]
१. जिसके विषय में कोई भावना न हो सके । दुर्बोध । अज्ञेय । उ॰—अगुन अलेख अमान एक रस । राम सगुन भए भक्त प्रेम बस ।—तुलसी (शब्द॰) ।
२. जिसका लेखा न हो सके । बेहिसाब । बेअंदाज । अनगिनत । बहुत अधिक । उ॰—योग जप ध्यान अलेख । तीरथ फिरे धरे बहु भेख ।—कबीर (शब्द॰) ।
अलेख ^२ पु वि॰ [सं॰अलक्ष्य] अदृश्य । उ॰—सितासित अरुनारे पानिप के राखिबे कों, तीरथ के पति हैं अलेख लखि हारे हैं ।—भिखारी॰ ग्रं॰, भा॰२, पृ॰ ३९ ।
अलेख ^३ पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ लेख=देवता] देवता । देव । उ॰—सजि तिय नरभेषनि सहित अलेखनि करहिं असेषनि गानन कों ।— भिखारी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ २२९ ।