अवक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अवक ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ √चक् = भ्रांत होना] घबराहट । भौचक्कापन । विस्मय । उ॰—तोम तन छाए, सुलतान दल आए, सो तो समर भजाए उन्हे छाई है अचक सी । — सूदन (श्ब्द॰) ।
अवक ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ √चक् = भ्रांत होना] घबराहट । भौचक्कापन । विस्मय । उ॰—तोम तन छाए, सुलतान दल आए, सो तो समर भजाए उन्हे छाई है अचक सी । — सूदन (श्ब्द॰) ।