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अवगाहना

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अवगाहना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ अवगाहन]

१. हलकर नहाना । निमज्जन करना । उ॰—जे सर सरित राम अवगाहहिं । तिन्हहिं देव सर सरित सराहहिं ।-तुलसी (शब्द॰) ।

२. डूबना । पैठना । धँसना । मग्न होना । उ॰—भूप रूप गुन सील सराही । रोवहिं सोक सिंधु अबगाही ।—तुलसी (शब्द॰) ।

अवगाहना ^२ क्रि॰ सं॰

१. थहाना । छानना । छानबीन करना । उ॰—अवगाहन, सीतहि चाहन, यूथप यूथ सबै पठाए ।-राम चं॰, पृ॰ ९० । (ख) सहज सुगंधि शरीर की, दिसी विदिसन अबगाहि । दूती ज्यों आई लिये, केशव शूर्पनखाहि ।-केशव (शब्द॰) ।

२. विचलित करना । हलचल डालना । मथना । उ॰—सुनहु सूत तेहि काल, भरत तनय रिपु मृतक लखि । करि उर कोप कराल, अवगाही सेना सकल ।—केशव (शब्द॰) ।

३. चलाना । हिलाना । डुलाना । उ॰—नद सोक विषाद कुसाग्र ग्रसैं करि धीरहि तें अवगाहनो है । हित दीनदयाल महा मृदु है कठिनो अति अंत निबाहनो हैं ।-दीन ग्रं॰, पृ २५८ ।

४. सोचना । विचारना । समझना । उ॰— (क) अंगसिंगार स्याम हित कीन्हे, वृथा होन ये चाहत । सूर स्याम आपैं की नाहिं, मन मन यह अवगाहत ।—सूर॰, १० । २०२८ । (ख) पच्छिम में याही में बड़ो है राजहंस एक सदा नीर छीर के विवेक अवगाहे ते ।—दूलह (शब्द॰) ।

५. धारण करना । ग्रहण करना । उ॰—जाही समय जौन ऋतु आवै । तबही ताको गुन अवगाहै ।—लाल (शब्द॰) ।