अवमर्द
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अवमर्द संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. ग्रहण का एक भेद । वह ग्रहण जिसमें राहु सूर्यमंड़ल या चंद्रमंड़ल को पूर्णाता से ढ़ँककर अधिक काल तक ग्रसे रहे ।
२. रौंदना । कुचलना ।
३. शत्रु को क्षत विक्षत करना ।
४. एक प्रकार का उल्लू [को॰] ।