अवियोग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अवियोग ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. वियोग का अभाव । उपस्थित ।
२. संयोग । मिलाप ।
अवियोग ^२ वि॰
१. वियोगशून्य । जिसका वियोग न हो ।
२. संयुक्त संमिलित । एकीभूत । यौ॰-अवियोगव्रत.=कल्कि पुराण के अनुसार एक व्रत जो अगहन शुक्ल तृतीया को पड़ता है । इस दिन स्त्रियाँ स्नान कर चंद्र दर्शन करके रात की दूध पीती है । यह व्रत सौभाग्यप्रद माना जाता है ।