अविरति
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अविरति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. निवृत्ति का अभाव । लीनता ।
२. विषयादि में तृष्णा का होना । विषयाशक्ति ।
३. विराम का अभाव । अशांति ।
४. जैनशास्त्रनुसार धर्मशास्त्र की मर्यादा से रहित बर्ताव करना । विशेष—यह बंधन के चार हेतुओं में से है और बारह प्रकार का है । पाँच प्रकार की इंद्रियाविरत, एक मनोविरति और छह प्रकार की कायाविरति ।