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अविरति

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

अविरति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. निवृत्ति का अभाव । लीनता ।

२. विषयादि में तृष्णा का होना । विषयाशक्ति ।

३. विराम का अभाव । अशांति ।

४. जैनशास्त्रनुसार धर्मशास्त्र की मर्यादा से रहित बर्ताव करना । विशेष—यह बंधन के चार हेतुओं में से है और बारह प्रकार का है । पाँच प्रकार की इंद्रियाविरत, एक मनोविरति और छह प्रकार की कायाविरति ।