अविहड़
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अविहड़ पु वि॰ [सं॰ अ+विघटय]
१. जो विहड़े नहीं । जो खंड़ित न हो । अखंड़ । अनश्वर । उ॰—(क) अविहड़ अखडित पीव है ताको निर्भय दास । तीनौ गुन के पेलि से चौथे कियो निवास ।— कबीर (शब्द॰) । (ख) अविहड़ आँग विहड़े नहीं अपलट पलट न जाय । दादू अनवट एक रस सब में रहा समाय । —दादू (शब्द॰) ।
२. दे॰ 'बीहड़' ।