अव्ययेत
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अव्ययेत संज्ञा पुं॰ [सं॰] यमकानुप्रास के दो भेदों में से एक जिसमें यमकात्मक अक्षरों के बीच कोई और अक्षर या पद न पड़े; जैसे—अलिनी अलि नीरज बसे प्रति तरुवरनि बहंग । त्यों मनमथ मन मथन हरि बसै राधिका संग । यहाँ 'अलिनी, अलि नी और' 'मनमथ मन मथ के बीचट कोई और पद नहीं है ।