अव्यापी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अव्यापी संज्ञा पुं॰ [सं॰ अव्यापिन्] [स्त्री॰ अव्यापिनी]
१. जो व्यापी न हो । जो सब जगह न पाया जाय ।
२. एक प्रकार का उत्तराभास जिसमें कहे हुए देश, स्थान का पता न चले; जैसे-'कोई कहे कि काशी के पूर्व मध्य देश में मेरा खेत अमुक ने लिया । यहाँ काशी के पूर्व मध्य देश नहीं, किंतु मगध देश है; अत: यह अव्यापी है ।