अशोकपुष्पमञ्जरी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अशोकपुष्पमंजरी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अशोकपुष्पमन्जरी] दंडक वृत्त का एक भेद जिसमें २८ अक्षर होते है और लघु और लघु गुरु का कोई नियम नहीं होता, जैसे-सत्यधर्म नित्य धारि व्यर्थ काम सर्व डारि भूलि कै करो कदा न निंद्य काम ।