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अश्वबंध

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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अश्वबंध संज्ञा पुं॰ [सं॰ अश्वबन्ध] चित्रकाव्य में वह पद्य जो घोड़े के चित्र में इस रीति से लिखा हो कि उसके अक्षरों से अंग प्रत्यंग तथा साजों और आभूषणो के रूप निकल आएँ ।