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अश्वियुगल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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अश्वियुगल संज्ञा पुं॰ [सं॰] दो कल्पित देवता जो प्रभाव के समय घोड़ों या पक्षियों से जुते हुए सोने के रथ पर चढ़कर आकाश में निकलते हैं । विशेष—कहते है कि यह लोगों के सुख सौभाग्य प्रदान करते हैं और उनके दुख तथा दरिद्रता आदि हरते हैं ।-कहीं कहीं यही अश्विनीकुमार भी माने गए हैं । कहते हैं कि दधीचि से मधु- विद्या सीखने के लिये इन्होंने उनका सिर काटकर अलग रख दिया था, और उनके धड़पर घोड़े का सिर रख दिया था; और तब उनसे मधुविद्या सीखी थी । वि॰ दे॰ 'दधीचि' ।