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अष्टवर्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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अष्टवर्ग संज्ञा पुं॰ [सं॰] जीवक, ऋषभक, मेदा, महाभेदा, काकोली, क्षीरकाकोली, ऋद्धि, और वृद्धि, इन आठ ओषधियों का समाहार ।

२. ज्योतिष का गोचरविशेष ।

३. नीतिशास्र के अनुसार किसी राज्य के ऋषि, बस्ती (बाजार आदि), दुर्ग, सेतु, हस्तिबंधन, खान, करग्रहण औऱ सैन्यसंस्थापन का समूह ।