असम्बाधा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]असंबाधा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ असम्बाध] एक वर्णवृत जिसके प्रत्येक चरण में मगण, तगण, नगण, सगण और दो गुरु होते हैं । /?/ जैसे—माता नासो गंग कठिन भव की पीरा । जाते ह्वै निःसंक भवति तुमरे तीरा । गावों तेरी ही गुण निस दिन बेबाधा । पावों जाते बेगि सुभगति असबाधा ।