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असैला

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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असैला पु वि॰ [सं॰ अ=नहीं+शैली=रीति] [स्त्री॰ असैली]

१. रीति नीति के विरुद्ध कर्म करनेवाला । कुमार्गी । उ॰— सभा-सरवर, लोक-कोकनद-कोकगन प्रमुदित मन देखि दिनमनि भोर हैं । अदुध असैल मनमैले महिपाल भए कछुक उलूक कछु कुमुद चकोर हैं । तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३०७ ।

२. शैली के विरुद्ध । अनुचित । रीतिविरुद्ध । उ॰—मैं सुनी बातैं असैली जे कहि निसिचर नीच । क्यों न मारै बैठो काल डाढ़नि बीच । —तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३७४ ।