अस्पर्स
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]अस्पर्स पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्पर्श] दे॰ 'स्पर्श' । उ॰—भएँ अस्पर्श देवतन धरिहै । मेरी कह्यौ नाहिं यह टरिहै । -सूर॰ ८ ।२ ।
अस्पर्स पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्पर्श] दे॰ 'स्पर्श' । उ॰—भएँ अस्पर्श देवतन धरिहै । मेरी कह्यौ नाहिं यह टरिहै । -सूर॰ ८ ।२ ।