आँक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आँक ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ अंक]

१. अंक । चिह्न । निशान ।

२. संख्या का चिह्न । अदद । उ॰—(क) तुलसी महीस देखे, दिन रजनीस जैसे, सूने पर सून से मनो मिटाए आँक के ।-तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३१८ । (ख) कहत सबै बेंदी दियै आँक दस गुनौ होत ।— बिहारी र॰, दो॰ २२७ ।

३. अक्षर । हरफ । उ॰—(क) बिरह तचैं उघरयौ सु अब सेंहुड़ कैसो आँकु ।-बिहारी र॰, दो॰ ४५७ । (ख) गुण पै अपार साधु, कहैं आँक चारि ही में अर्थ बिस्तारि कविराज टकसार है ।-प्रिया॰ (शब्द॰) ।

४. गढ़ी हुई बात ।

५. दृढ़ निश्चय । निश्चित सिद्धंत । उ॰— जाउँ राम पहिं आएसु देहू । एकहि आँक मोर मत एहू ।— मानस, २ ।१७८ । (ख) एकहि आँक इहइ मन माहीं । प्राप्त काल चलिहौं प्रभु पाहीं ।-मानस, २ ।१८३ ।

६. अंश । हिस्सा । उ॰—काम-संकल्प डर निरखि बहु बासनहिं आस नहिं एकहू आँक निरबान की ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ५६३ ।

७. किसी मनुष्य के नाम पर प्रसिद्ध वंश; जैसे, वे बड़े कुलीन हैं, वे अमुक आँक के हैं ।

८. अँकवार । गोद । उ॰—पीछे ते गहि लाँकरी, गही आँक री फेरि ।-सं॰ सप्तक, पृ॰ २४३ । मुहा॰—आँक भरना=आलिंगन करना । उ॰—छीतस्वामी गिरिवरधर मगन भए आँको भरत, सुख स्वाद इहै, समै कौ कहत न बनि आवै ।-छीत॰, पृ॰ ४१ ।

९. भाग्य । उ॰—एक को आँक बनावत मेटत पोथिय काँख लिए दिन जैहै ।-घनानंद (भू॰) पृ॰ ५३ ।

१०. शान । उ॰—कठिन काठियावाड़ चुटीले के परिपोखे, चंचल चपल चलाँक बाँकपन आँक अनोखे ।-रत्नाकर, भा॰ १, पृ॰ ११२ ।

११. अँकुर । उ॰—जाम्यों आँक अकार नेह दिन दिन बढ़त करम संदेह ।— भीखा शा॰, पृ॰ ४७ ।

१२. नौ मात्रा के छंदों की संख्या । अंक ।

१३. छकड़े या बैलगाड़ियों की बल्लियों के नीचे दिया हुआ । लकड़ी का मजबूत ढाँचा जिसमें धुरी पहिए में पहनाई जाती है ।

आँक ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'आँख' । उ॰—जितवा है बिन जिव में सुनता है बिन कान । देखता है बिन आँक से, कादर बिन तन जान ।-दक्खिनी॰ पृ॰ ३८५ ।