आकर्षण

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आकर्षण ^२ संज्ञा पुं॰ चुंबक [को॰] ।

आकर्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ आकर्षित, आकृष्ट]

१. किसी वस्तु का दूसरी वस्तु के पास उसकी शक्ति या प्रेरणा से लाया जाना ।

२. खिचाव ।

२. तंत्रशास्त्र का एक प्रयोग जिसके द्वारा दूर देशस्थ पुरूष या पदार्थ पास में आ जाता है । क्रि॰ प्र॰—करना । होना । यौ॰ — आकर्षण मंत्र । आकर्षण विघा । आकर्षण शत्कि ।