आखा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आखा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ आक्षरण=छानना] झीने कपड़े से मढ़ा हुआ एक मेड़रेदार बरतन जिसमें मोटे आटे को रखकर चालने से मैदा निकलता है । एक प्रकार की चलनी । आँधी ।

आखा ^२ संज्ञा पुं॰ [देश॰] खुरजी । गठिया ।

आखा ^३ वि॰ [सं॰अक्षय, प्रा॰ अक्खय]

१. कुल । पूरा । समूचा । समस्त । उ॰—कहियैं जिय न कछू सक राखौ । लाँबी मेलि दई हैं तुमकौ, बकत रहौ दिन आखौ ।—सूर॰, १० । ३५४० । जैसे,—उसे आज आखा दिन बिना खाए बीता ।

२. अनगढ़ा । समूचा । जैसे,—आखा लखड़ी (लश्करी) ।