आख्यानिकी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]आख्यानिकी संज्ञा पुं॰ [सं॰] दंडक वृत्त के भेदों में से एक जिसके विषम चरणों में त, त, ज, ग, ग, और सम में ज, त, ज, ग, ग हो । उ॰—गोविंद गोविंद सदा रटौ जू । असार संसार तबै तरौ जू । श्रीकृष्ण राधा भजु नित्य भाई । जु सत्य चाहो अपनी भलाई (शब्द॰) । विशेष—इसके विरुद्ध अर्थात् इसके विषम रचण का लक्षण सम चरण में आने और सम चरण का लक्षण विषम चरण में आवे, तो उस वृत्त को ख्यानिकी कहेंगे ।