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आज्यभाग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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आज्यभाग संज्ञा पुं॰ [सं॰] घृत की दो आहुतियाँ जो अग्नि और सोमदेवताओं को उत्तर और दक्षिण भागों में आधार के पीछे दी जाती हैं । विशेष—इनके अविच्छिन्न होने का नियम नहीं है । ऋग्वेदी लोग 'अग्नेय स्वाहा' से उत्तर ओर और 'सोयाम स्वाहा' से दक्षिण ओर आहुति देते हैं, पर यजुर्वेदी लोग उत्तर और दक्षिण दिशाओं में भी पूर्वार्ध और पश्चिमार्ध का विभाग करके उत्तर और दक्षिण दोनों के पूर्वार्द्ध भाग ही में देते हैं । आधार और आज्यभाग आहुति के बिना हवि से आहुति नहीं दी जाती ।