आधा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

आधा वि॰ [सं॰ आर्द्ध, वा अद्धो, प्रा॰ अद्ध] [स्त्री॰ आधी] किसी वस्तु के दो बराबर हिस्सों में से एक । यौ॰— आधा साझा । आधा सीसी । मुहा॰— आधो आध = दो बराबर भागों में । जैसे — इन केलों को आधो ऐध बाँट लो । [यह क्रि॰ वि॰ की तरह आता है; जैसे, बीचो बीच ] आधा तीतर आधा बटेर = कुछ एक तरह का और कुछ दुसरी तरह का । बेजोड़ । बेमल । अंजबंड । क्रमविहीन । आधा होना = दुबला होना । जैसे,— वह सोच के मारे आधा हो गया । आधे आध = दो बराबर हिस्सों में बँटा हुआ । उ॰— लागे जब संग युग सेर भोग धरयो रंग आधे आध पाव चले नूपुर बजाइ के । — प्रिया॰ (शब्द॰) । आधे कान सुनना = यों ही या ऊपर से सुन लेना । उ॰— फैले बरसाने में न रावरी कहानी यह बानी कहूँ राधे आधे कान सुनि पावे ना । — रत्नाकार , भा॰ १, पृ॰ १४७ । आधी बात = जरा सी भी अपमानसूचक बात । जैसे,— हमने किसी की आधी बात भी नहीं सुनी । आधे पेट खाना = भरपेट न खाना । पूरा भोजन न करना । आधे पेट रहना = तृप्त होकर न खाना । आधी बात कहना या मुहँ से निकलना = जरा सी अपमानसूचक बात कहना । जैसे, — मेरे रहते तुम्हें कोई आधी बात नहीं कह सकता । आधी बात न पूछना = कुछ ध्यान न देना । कदर न करना । जैसे, — अब वे जहाँ जाते हैं, कोई आधी बात भी नहीं पूछता ।