आरि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]आरि पु संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ अड़] हठ । टेक । जिद । उ॰—(क) द्वार हौं भोर ही को आजु । रटत रिरिहा, आरि और न, कौर ही ते काजु । —तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ५७८ । (ख) तब सकोप भगवान हरि तीछन चक्र प्रहारि । धर ते सीस धरा, धरा, करि लीनहीं श्रुति आरि । —गोपाल (शब्द॰) ।