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आर्तध्यान

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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आर्तध्यान संज्ञा पुं॰ [सं॰] जैनियों के मतानुसार वह ध्यान जिससे दु:ख हो । विशेष—यह चार प्रकार का है —(१) अनिष्टार्त संयोगार्त ध्यान । (२) इष्टार्थ वियोगार्त धयान । (३) रोग निदानार्त ध्यान और (४) आग्रशोचनमार्त ध्यान ।