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आर्षप्रयोग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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आर्षप्रयोग संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. शब्दों का वह व्यवहार जो व्याकरण के नियम के विरूद्ध हो । विशेष—प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में प्राय: व्याकरणविरूद्ध प्रयोग मिलते हैं । ऐसे प्रयोगों को व्याकरण की रीति से अशुद्ध न कहकर आर्ष कहते हैं ।

२. छद में कवियों का किया हुआ व्याकरणविरूद्ध प्रयोग ।