आशिषाक्षेप
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]आशिषाक्षेप संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह काव्यालंकार जिसमें दूसरों का हित दिखालाते हुए ऐसी बातों को करने की शिक्षा दी जाय जिनसे वास्तव में अपने ही दुःख की निवृत्ति हो । उ॰—मंत्री मित्र पुत्र जन केशव कलत्र गन सोदर सुजन जडन भट सुख साज सों । एतो सब होतै जात जो पै है कुशल गात, अबही चलै कै प्रात, सगुन समाज सों । कीन्हों जु पयान बाध छमिऔ सु अपराध, रहिऔ न पल आध, बँधिऔ न लाज सों । हौ न कहौं, कहत निगम सब अब सब तब, राजन परम हित आपने ही काज सों । —केशव ग्रं॰, भा॰१, पृ॰ १५६ ।