आश्रव
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]आश्रव संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. किसी के कहे पर चलना । वचन । स्थिति ।
२. अंगीकार ।
३. क्लेश ।
४. जैनमत के अनुसार मन, वाणी और शरीर से किए हुए कर्म का संस्कार जिसे जीव ग्रहण करके बद्ध होता है । यह दो प्रकार का है— पुण्याश्रव और पापाश्रव ।
५. बौद्ध दर्शन के अनुसार विषय जिसमें प्रवृत्त होकर मनुष्य बंधन में पड़ता है । यह चार प्रकार का है—कामाश्रव, भावाश्रव, दृष्टाश्रव और अविद्याश्रव ।
६. अग्नि पर पकते हुए चावल के बुदबुद् या फेन (को॰) ।
७. सरिता । नदी (को॰) ।
७. प्रवाह । धारा (को॰) ।