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आसना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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आसना ^१ पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ अस्=होना] होना । उ॰ —(क) है नाहीं कोइ ताकर रूपा । ना ओहि सन कोइ आहि अनूपा ।—जायसी ग्र॰, पृ॰ ३ । (ख) मरी उरी कि टरी बिथा, कहा खरी, चलि चाहि । रही कराहि कराहि आति अब मुँह आहि न आहि ।—बिहारी र॰, दो॰, ५६ । विशेष—इस क्रिया का प्रयोग वर्तमान काल में ही मिलता है और इसका रूप 'आहि' या आहि का ही कोई विकारी रूप होता है ।

आसना ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. जीव ।

२. वृक्ष ।