ईण्ट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ईंट संज्ञा स्त्रीं [इष्टका, ,पा॰ इद्ट का , पा॰ इट्टआ]

१. साँचे में ढ़ाल हुआ मिट्टा का चौखूँटा लंबा दुकड़ा जो पजावे में पकाया जाता हैं । इसे जोड़कर दीवार उठई जाती है । उ॰— हीरा ईट कपूर गिलावा । औ नग लाइ सरग लै आवा । — जायसी ग्रं॰, पृ १८ । विशेष— ईट के कई भेद हैं— (क) लखौरी, जो पुराने ढ़ंग की पतली ईंट है । (ख) नंबरी जो मोटी है और नए ढ़ंग की इमारतों में लगती । (ग) पुठ्ठी जो यथार्थ में मिट्ठी की एक चौड़ी परिधि के बराबर खंड़ करके बनाई जाती है । ये खंड या ईटें कूएँ की जोड़ाई में काम आती हैं । इनके सिवा और भी कई प्रकार की ईंटें होती हैं; जैसे ककैया ईट, नौतेरही ईट, ननिहारी ईट, मेज की ईंट, फर्रा ईट और तामड़ा ईंट । क्रि॰ प्र॰— गढ़ना= ईट को हथौड़ो से काट छाँटकर जोड़ाई में बैठने योग्य करना । — चुनना = ईंटों की जोड़ाई करना । — जोड़ना= दीवार उठाते समय एक ईट के ऊपर या बगल में दूसरी ईंट रखना ।— पाथना या पारना = गीली मिट्टी को साँचे में ढ़ाल कर ईंट बनाना । यौ॰.—ईंटकारी= ईंट का काम । ईंट की जोड़ी । ईंट का परदा = ईंट की एकहरी जोड़ाई की परली दीवार जो प्राय: विभाग करने के लिये उठाई जाती है । मुहा॰—ईंट का छल्ला देना = कच्ची दीवार से सटाकर ईंट की एकहरी जोड़ाई करना । ईंट से ईंट बजना = (१) किसी नगर या घर का ढह जाना या ध्वंस होना । जैसे, — जहाँ कभी अच्छे अच्छे नगर थे, वहाँ आज ईट से ईट बज रही है । (२) ताबाह होना । घरबार तक ध्वस्त हो जाना । ईंट से ईंट बजाना= (१) किसी नगर या घर को ढहाना या ध्वस्त करना । (२) तबाह करना । बर्बाद करना । जैसे, — महमूद जहाँ गया वहाँ उसने ईंट से ईट बजा दी । डेढ़ या ढाई ईंट की मसजिद अलग बनाना = सबसे निरालां ढंग रखना । जो सब लोग कहते या करते हो; उसके विरूद्ध कहना या करना । गुड़ दिखाकर ईंट या ढेला मारना = भलाई की आशा देकर बुरीई करना । ईंट पत्थर = कुछ नहीं । जैसे, — (क) तुमने इतने दिनों तक क्या पढ़ा, ईंट पत्थर ? (ख) उन्हें ईट पत्थर भी नहीं । आता ।

२. धातु का चौखूँटा ढला हुआ टुकड़ा । जैसे, — सोने की ईट । चाँदी की ईंट ।

३. ताश का एक रंग जिसमें ईंट का लाल चिहन बना रहता है ।